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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥


GAU SAPRANH™


"प्राणियों में 🌸 सद्भावना हो,  विश्व का 🌸 कल्याण हो,  भारतमाता की 🌸जय हो,  गौमाता की 🌸 जय हो।"

 In English

May there be goodwill among all living beings
May there be welfare across the world
Victory to Bharat Mata
Victory to Gau Mata



गौ सप्राण™ क्या है?


गौ सप्राण™ उच्चतमं दैवीयशक्तेः प्रतीकम्।
जीवितप्रतीकानां ध्रुवं धर्मतः संधितम्।।
ईश्वरस्य शुभेणैव निर्मितं तत्त्वसंघटनम्।
त्रयोदशकोटीनां च देवतानां च आशीर्वादम्।।


हिंदी अर्थ:

गौ सप्राण™ उच्चतम दैवीय शक्ति का प्रतीक है। यह जीवित प्रतीकों की एक दृढ़ संरचना है, जो उच्च धार्मिक अनुसंधान से निर्मित है। यह ईश्वर के आशीर्वाद से बना है, जिसमें ३३ कोटि देवी-देवताओं के आशीर्वाद भी शामिल हैं।

   In English

Gau Saprāṇh™ is the supreme symbol of divine power. It is a steadfast structure of living symbols created through high religious research. It is made with the blessings of God, which also includes the blessings of thirty-three koti gods and goddesses.

 

"गौ सप्राण™" संपूर्ण पृथ्वी पर श्रेष्ठतम है। मेरे महान भारतवर्ष के प्रत्येक सनातनी या चिरंतन हिंदू को अपने घर में गौ माता के जाग्रत प्रतीकों को हृदय की सकारात्मक भावना से गौ माता मानकर उनकी सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हो, जिससे उनके सभी प्रकार के दुःखों और कष्टों का नाश हो, समस्त दोषों का निवारण हो, और वे सभी प्रकार की संपदाओं से युक्त होकर पृथ्वी लोक में सुख और समृद्धि के साथ अपना जीवन व्यतीत करें तथा परलोक में भी अपने पितरों और स्वजनों सहित ईश्वर का साक्षात्कार कर परम आनंद प्राप्त करें।— यही इसका उद्देश्य है।"

In English

"‘Gau Sapran™’ is the supreme and most revered on the entire Earth. It is our sincere wish that every Sanatani or eternal Hindu of my great nation, Bharatvarsha, may be blessed with the opportunity to serve the living symbols of Mother Cow in their homes, honoring them with heartfelt devotion as embodiments of Gau Mata. By doing so, may all their sorrows and sufferings be destroyed, all their faults be purified, and may they be endowed with every kind of wealth—living a life of happiness and prosperity on Earth. And in the afterlife too, may they attain the divine presence of God along with their ancestors and loved ones, experiencing supreme bliss.
This is the very purpose of this initiative."







गौसप्राणः समावेशो हि, गवां जीवत्स्वरूपकः।
त्रयस्त्रिंशत् सुराणां च, गवां चाशिष्समुद्भवः॥
वेदमार्गेण संसिद्धो, मन्त्रैर्वेद्यैः समन्वितः।
संशोधितोऽयं पूज्यश्च, वेदविज्ञानसंश्रयः॥


हिंदी अर्थ:

"‘गौसप्राण™’ गौमाता के जाग्रत प्रतीकों का ऐसा संकलन है, जिसमें गौमाता में वास करने वाले 33 कोटि देवताओं एवं गौमाता के आशीर्वाद की भावना समाहित है। इसे वैदिक विधि, वैदिक अनुसंधान एवं वैदिक मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर सिद्ध किया गया है।"

In English


"‘Gau Sapran™’ is a sacred collection of living symbols of Mother Cow, embodying the divine presence of the 33 koti deities believed to reside within her, along with the blessings of Gau Mata herself. It has been consecrated and sanctified through Vedic rituals, Vedic research, and the chanting of Vedic mantras."
 

THREE AWAKENED SYMBOLS OF GAU MATA
















गौ माता के तीन जाग्रत प्रतीक


1. शोधित एवं अभिमंत्रित गौ चरण रज

वेदों एवं शास्त्रों में गौ चरण रज का महत्व

1. पवित्रता एवं शुद्धिकरण का प्रतीक

अथर्ववेद और धर्मशास्त्रों में वर्णित है कि गौ चरण रज (जिस स्थान पर गौमाता चली हो) पवित्र मानी जाती है।

इसे शुद्धिकरण (purification) के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे पूजा स्थान, घर या यज्ञ भूमि की सफाई के लिए।


धार्मिक मान्यता:

"जहाँ गौमाता चलती है, वहाँ तीर्थ का वास होता है।"
गौमाता के खुर की रज से वातावरण, भूमि और शरीर तीनों पवित्र होते हैं।

 

2. गौ-रज से चित शुद्धि

पुराणों में वर्णन:


गौ माता के खुरों से उड़ी हुई धूल (गौरज) का स्पर्श भी पापों का नाश करने वाला होता है।


श्रीमद्भागवत पुराण (10.38.23)
 

"गावः पदावनिहिता महीध्र धूलिः
स्पृष्टा स्म देहं निखिलं पुनाति।"


अर्थ:

गौमाता के चरणों से उठी धूल सम्पूर्ण शरीर व आत्मा को पवित्र कर देती है।

 महिमा

संत तुलसीदास कहते हैं:

गौमाता की चरण रज पूजत प्रभु राम,
जिनके करतल में सब काम।”

 

संत एकनाथ महाराज:

“गौरज अंग लगाय, पाप हरि मन सुख पाय।”
 

निष्कर्ष:

गौ चरण से प्राप्त ‘लाभराज’ साधारण मिट्टी, धूल या जल नहीं होते — वे आध्यात्मिक ऊर्जा, पवित्रता और परमात्मा के कृपा-स्रोत हैं। उनका उचित श्रद्धा से उपयोग न केवल जीवन में शुभता लाता है, बल्कि मोक्ष मार्ग की ओर भी प्रेरित करता है।


किससे तिलक करें?

चरणरज (गोधूलि) का तिलक पूज्य श्री कहते हैं - ‘देशी गाय की चरणरज (गोधूलि) का तिलक करने से भाग्य की रेखायें बदल जाती हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण (श्रीकृष्णजन्म खंड: २१.१४) में आता है:
गोष्पदस्तम्भुजा यो हि तिलकं कुरुते नरः। तीर्थस्नातो भवेत्सद्यः जयस्तस्य पदे पदे॥


गौमाता  के चरणों की रज का तिलक जो मनुष्य अपने मस्तक में लगाता है, वह तत्काल तीर्थस्नान में स्नान करने का पुण्यफल प्राप्त करता है और पग-पग पर उसकी विजय होती है।


2. शोधित एवं अभिमंत्रित गौजल 

गौमूत्र का धार्मिक महत्व – धार्मिक ग्रंथों के अनुसार

गौमाता हिंदू धर्म में सर्वोच्च पूज्य मानी जाती हैं, और उनके पाँच उत्पाद (पंचगव्य) – दूध, दही, घी, गोबर और गौजल – अत्यंत पवित्र माने गए हैं।

धार्मिक ग्रंथों में गौजल का उल्लेख:

1. मनुस्मृति (अध्याय 5, श्लोक 105)

"पञ्चगव्यं पिबेन्नित्यं जीवन्नेव शतं समाः।"

भावार्थ:

जो मनुष्य प्रतिदिन पंचगव्य (जिसमें गौजल भी शामिल है) का सेवन करता है, वह सौ वर्षों तक स्वस्थ जीवन जीता है।


2. अथर्ववेद (11.1.34)

"गव्यं अमृतं पिबेत्।"

भावार्थ:

गौमाता से प्राप्त पदार्थ अमृत के समान है। इसमें गौजल भी शामिल है।

 

3. गरुड़ पुराण:

"गवां मूत्रं पिबेद्यस्तु नित्यं स नरः सदा।
पापं नश्यति सर्वं च महाभयात् प्रमुच्यते।।"


भावार्थ:

जो व्यक्ति नियमित गौजल का सेवन करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और वह भयमुक्त हो जाता है।


4. महाभारत (अनुशासन पर्व):

गौजल को पवित्र करने वाला, रोग नाशक और आत्मा को शुद्ध करने वाला कहा गया है।

धार्मिक उपयोग व महत्व:

शुद्धिकरण:

धार्मिक अनुष्ठानों में भूमि और वातावरण की शुद्धि हेतु गौजल छिड़का जाता है।

पाप नाशक: इसे ग्रहण करने या छिड़कने से पापों का नाश माना गया है।

तंत्र-मंत्र से रक्षा: गौमूत्र का छिड़काव नकारात्मक ऊर्जा और तांत्रिक प्रभावों से बचाव करता है।

यज्ञ और हवन में: अग्निहोत्र में पंचगव्य का प्रयोग किया जाता है, जिसमें गौजल भी आवश्यक है।


 निष्कर्ष:

गौजल  न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्रता का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक कर्मकांडों, यज्ञ, अनुष्ठानों, शुद्धि और साधना में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक ऐसी दिव्य शक्ति है जो आत्मा, शरीर और वातावरण – तीनों को शुद्ध करने में समर्थ मानी गई है।

3. शोधित एवं अभिमंत्रित गौयमकार्षि


1. अथर्ववेद (11.1.34)

"गोमयेन पवित्रं भवन्तु विश्वानि भूतानि।"

भावार्थ:

गौयमकार्षि से समस्त जीवों की शुद्धि होती है।

 

2. मनुस्मृति (5.105)

गौयमकार्षि पंचगव्य का अंग है। पंचगव्य: दूध, दही, घी, गोबर, गौमूत्र – ये पाँच पदार्थ अत्यंत पवित्र माने गए हैं और इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है।


3. पद्म पुराण:

"गोमयं पवित्रं च विष्णोः प्रियं सदा स्मृतम्।"

भावार्थ:

गोमय (गौ का गोबर) विष्णु भगवान को प्रिय है और यह अत्यंत पवित्र है।
 

4. स्कंद पुराण:

गौयमकार्षि  में लक्ष्मी, गंध, औषधि, शुभता एवं त्रिदेवों का वास बताया गया है।

 

 

 



GAU SAPRANH™

 

 


 

 

"गौ सप्राण™ एक जाग्रत दिव्य ऊर्जा का स्रोत है, जिसके निर्माण में प्रयुक्त समस्त सामग्री को गहन अनुसंधान के पश्चात चयनित कर उपयोग में लाया गया है।

सबसे पहले, इसमें उपयोग किया गया काँच सामान्य पुनर्नवीनीकरण काँच न होकर 'बोरोसिलिकेट काँच' है, जिसे शिवलिंग से मिलते-जुलते आकार में ढाला गया है। यह विशेष संरचना अपने आस-पास की समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश कर सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करती है।


गौ सप्राण™ में प्रयुक्त धातु शुद्ध मुख्य रूप में तांबा व अल्प मात्रा में पीतल है, जो अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा को समाहित करता है। सभी वैदिक एवं दिव्य अनुष्ठानों में तांबे से निर्मित वस्तुओं को विशेष मान्यता प्राप्त है, और यह प्रत्येक रूप में मानव जीवन के लिए लाभकारी सिद्ध होता है।

 

गौ सप्राण™ को तीन विशिष्ट आभाओं (रंग-रूपों) में निर्मित किया गया है:
 

  1. स्वर्ण आभा में गौ सप्राण™
     

  2. रजत आभा में गौ सप्राण™
     

  3. ताम्र आभा में गौ सप्राण™

    "गौ सप्राण™ के आधार में आम की लकड़ी का उपयोग किया गया है, जो धार्मिक और वैदिक दृष्टि से श्रेष्ठतम है।"


    "गौ सप्राण™ एक अद्वितीय दिव्य शक्ति का प्रतीक है। "गौ सप्राण™ गौमाता का वह पावन स्वरूप हैं, जिनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यह एक जाग्रत गौमाता प्रतीक का संग्रह है, जिसे उच्च धार्मिक अनुसंधानों एवं प्राकृतिक साधनों के माध्यम से निर्मित किया गया है। यह केवल मानवों के लिए ही नहीं, बल्कि देवताओं के लिए भी पूज्यनीय है। गौ सप्राण™  को आप अत्यंत सरलता से अपने घर, दुकान या कार्यालय या मंदिर, मिल, उत्पादन इकाई, उद्योगफैक्ट्री ,वाहन में स्थापित कर सकते हैं। स्थापना से पूर्व प्रतिमा को स्वच्छ करके उस पर गंगाजल का अभिषेक और गाय के घी का दीपक प्रज्वलित कर श्रद्धा पूर्वक पूजन करें। गौ सप्राण™ को अपने हृदय की सच्ची भावनाओं के साथ सजीव गौमाता का भाव मानकर स्थापित करें।ऐसा करने से आपके परिवार की सभी प्रकार की समस्याओं, कष्टों, दुखों एवं दोषों का नाश होगा तथा आप पर सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहेगी। आपके घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा नहीं रहेगी और परिवार में सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल का वास होगा।

    गौमाता की जय!"

    "प्रत्येक सनातनी / चिरंतन हिंदू परिवार में गौमाता की प्रतिष्ठा स्थापित होनी चाहिए। जहाँ गौमाता का पालन संभव न हो, वहाँ कम से कम गौ स्वरूप (गौ सप्राण™) की स्थापना होना आपके हिंदू होने का प्रमाण है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे धार्मिक संस्कारों को मन, वचन और कर्म से धारण करने का संकल्प भी है।मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदू हूँ, और मेरे यहाँ गौ सप्राण™ स्थापित है — जय गौमाता!"


    In English :

     Gau Sapranh™: A Symbol of Divine Energy

    Gau Sapranh™ is a unique symbol of divine power.

    It represents the sacred form of Gau Mata (Mother Cow), in whom the 33 crore (330 million) deities are believed to reside. Gau Sapran™ is a collection of awakened, spiritually energized symbols of Gau Mata, created through advanced religious research and natural methods. It is not only revered by humans but is also considered venerable by the deities.

    You can easily install Gau Sapranh™ in your home, shop, office, temple, Mill, Manufacturing Unit, Industry, Factory, or vehicle. Before installation, cleanse the Gau Sapranh™ and perform abhishek (ritual bathing) with Ganga water, light a lamp of cow's ghee, and offer respectful worship with true devotion.

    Gau Sapranh™ with the heartfelt belief that it embodies the living presence of Gau Mata. Doing so will eliminate all kinds of problems, suffering, and negativity from your family. The blessings of all deities will remain upon you. Your home will be free from any form of negative energy, and your family will experience peace, prosperity, and divine grace.

    Victory to Gau Mata!

    A Message to Every Sanatani / Eternal Hindu Household

    Every Sanatani or Eternal Hindu family should establish the sacred presence of Gau Mata in their lives.Where it is not possible to care for a real cow, at the very least, one should install a symbolic form such as Gau Sapranh™.This stands as a mark of your Hindu identity and serves as a commitment to passing on our spiritual values to future generations through thought, word, and action.I am proud to be a Hindu, and I have Gau Sapranh™ installed in my
    home — Victory to Gau Mata!

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